​अंतरिक्ष में इंसान को जिंदा रखेगा यह नन्हा पौधा: नासा (NASA) ने बताया भविष्य का ‘स्पेस सुपरफूड’

कल्पना कीजिए कि आप धरती से करोड़ों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष के एक बंद केबिन में सफर कर रहे हैं। चारों तरफ अंधेरा है, गुरुत्वाकर्षण (Gravity) गायब है, और खाने के नाम पर आपके पास महीनों पुराना डिब्बाबंद (Packed) खाना है। कैसा लगेगा? ज़ाहिर है, कुछ ही दिनों में आपका शरीर बीमारियों का घर बन जाएगा।

​लेकिन वैज्ञानिकों ने इसका एक ऐसा तोड़ निकाल लिया है जो आकार में तो उंगली जितना छोटा है, पर इसके फायदे ब्रह्मांड जितने बड़े हैं! हम बात कर रहे हैं माइक्रो ग्रीन्स (Microgreens) की।

​हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और USDA (यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर) की संयुक्त रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर किए गए Veg-04B और Veg-06 प्रयोगों में यह साबित हो चुका है कि माइक्रो ग्रीन्स सिर्फ धरती के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में इंसानी बस्तियां बसाने के लिए भी सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाले हैं।

​आइए जानते हैं इस अद्भुत वैज्ञानिक रिसर्च के 5 सबसे बड़े और चौंकाने वाले सच:

​1. ‘जीरो ग्रेविटी’ की बीमारियों के खिलाफ सबसे मजबूत ढाल

​अंतरिक्ष में सबसे बड़ी समस्या होती है ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ (Oxidative Stress) और ‘मसल लॉस’ (मांसपेशियों और हड्डियों का कमजोर होना)। अंतरिक्ष के खतरनाक रेडिएशन (विकिरण) के कारण शरीर के सेल्स डैमेज होने लगते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence): नासा और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड’ की रिसर्च के अनुसार, ब्रेसिका (Brassica) फैमिली यानी लाल गोभी, राई, सरसों और ब्रोकली के माइक्रो ग्रीन्स में आम बड़ी सब्जियों के मुकाबले 40 गुना तक ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स, कैरोटीनॉयड और विटामिन K, C, E पाए गए हैं। यह शक्तिशाली कॉम्बिनेशन अंतरिक्ष यात्रियों की आंखों की रोशनी, दिल की सेहत और हड्डियों को टूटने से बचाता है।

​2. सिर्फ 500 ग्राम बीज और 11 साल का राशन!

​स्पेसशिप में हर एक सेंटीमीटर जगह की कीमत करोड़ों रुपये होती है। वहाँ भारी-भरकम राशन ले जाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में नासा के वैज्ञानिकों ने एक जादुई गणित (Mathematical Model) पेश किया है।

  • जगह की जरूरत: मात्र 40 वर्ग सेंटीमीटर (40\text{ cm}^2) का एक छोटा सा डिब्बा (ग्रोथ चैंबर)।
  • पैदावार: सिर्फ 1.66 ग्राम बीज डालकर मात्र 10 से 14 दिनों में 76 ग्राम ताज़ा और रसीला माइक्रो ग्रीन्स तैयार हो जाता है।
  • चमत्कारी निष्कर्ष: नासा के डेटा के अनुसार, यदि अंतरिक्ष यात्री अपने साथ सिर्फ आधा किलो (500 ग्राम) माइक्रो ग्रीन्स के बीज रख लें, तो वे लगातार 11 साल 7 महीने तक अपने लिए ताज़ा और उच्च पोषक तत्वों से भरपूर भोजन खुद उगा सकते हैं!

​3. अंतरिक्ष का ‘टेस्ट बस्टर’ (स्वाद का धमाका)

​क्या आप जानते हैं कि अंतरिक्ष में जाने पर इंसानों की स्वाद ग्रंथियां (Taste Buds) सुन्न हो जाती हैं? वहां फ्लूइड शिफ्ट के कारण हमेशा ऐसा लगता है जैसे नाक बंद हो, जिससे खाने का स्वाद ही नहीं आता।

​नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने रिव्यू में बताया कि डिब्बाबंद फीका खाना खाते-खाते जब उन्होंने स्पेस स्टेशन में उगाई गई मूली और राई के माइक्रो ग्रीन्स को खाया, तो उसका तीखा और चटपटा स्वाद (Tangy & Spicy Flavor) उनके लिए एक वरदान जैसा था। इसने न सिर्फ उनका स्वाद लौटाया बल्कि उनका मानसिक तनाव भी कम किया।

​4. मुफ़्त में ऑक्सीजन का बोनस

​स्पेस स्टेशन के बंद वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) को साफ करना और ताज़ा ऑक्सीजन (O_2) बनाना एक बेहद खर्चीली और जटिल प्रक्रिया है।

​माइक्रो ग्रीन्स यहाँ भी एक सच्चे दोस्त की तरह काम करते हैं। जैसे-जैसे ये नन्हे पौधे उगते हैं, ये अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा छोड़ी गई जहरीली CO_2 को सोख लेते हैं और बदले में ताज़ा, प्राकृतिक ऑक्सीजन (O_2) छोड़ते हैं। यानी यह एक ऐसा फूड सोर्स है जो हवा को भी फिल्टर करता है।

​5. जब यह अंतरिक्ष में कमाल कर सकता है, तो आपकी रसोई में क्यों नहीं?

​नासा का यह प्रयोग पूरी मानव जाति की आंखें खोलने वाला है। जरा सोचिए:

  • ​जिस पौधे को उगाने के लिए नासा को मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ी (यह सिर्फ कोकोपीट या पानी में उग जाता है)…
  • ​जिसे उगाने के लिए किसी महंगे खेत की नहीं, बल्कि एक छोटे से डिब्बे की जरूरत है…
  • ​जिसमें पारंपरिक खेती से 95% कम पानी लगता है…

​उसे हम अपने घर की खिड़की या रसोई में क्यों नहीं उगा रहे हैं? आज जब हमारी धरती पर मौसम बदल रहा है, पानी की कमी हो रही है और बाज़ार में मिलने वाली सब्जियों में कीटनाशक (Pesticides) भरे पड़े हैं, ऐसे में माइक्रो ग्रीन्स ही हमारी ‘पोषण सुरक्षा’ (Nutritional Security) का इकलौता भविष्य हैं।

​निष्कर्ष: अब हमारी बारी है!

​नासा ने तो साबित कर दिया कि माइक्रो ग्रीन्स ‘स्पेस एज सुपरफूड’ है। अब समय आ गया है कि हम इसे अपनी थाली का हिस्सा बनाएं। अपने बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए और खुद को गंभीर बीमारियों से दूर रखने के लिए, आज ही से अपने घर में “माइक्रो ग्रीन्स क्रांति” की शुरुआत करें।

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