June 2026

सूर्य-संवाद: क्या आपकी आँखें रोज़ सुबह शरीर का ‘सॉफ्टवेयर’ रीसेट करती हैं? जानिए SCN पाथवे का विज्ञान

हम अक्सर सुनते हैं कि “सुबह जल्दी उठना सेहत के लिए अच्छा है।” लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Modern Medical Science) इसे महज़ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि हमारे जीवित रहने का सबसे महत्वपूर्ण जैविक नियम मानता है। साल २०१७ में जब तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों को क्रोनोबायोलॉजी (Chronobiology) पर चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया, तब […]

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जून का ऋतु-परिवर्तन और ‘सीजनलिस्ट’ (Seasonalist) चॉइस: क्या इस मानसून हमारी थाली में सजना चाहिए ‘जिमीकंद’?

जैसे ही जून के अंत में मानसून की पहली फुहारें पड़ती हैं, हमारे आस-पास ‘हेल्थ और सुपरफूड’ की सलाह देने वालों की बाढ़ आ जाती है। लेकिन खान-पान के मामले में किसी भी बात के पीछे आंख मूंदकर भागने के बजाय सत्य और वैज्ञानिक प्रामाणिकता को समझना जरूरी है। ​आज हम बात करेंगे एक ऐसे

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​नवोद्भीद पोषण-दर्शन: षोडश शताब्दी के वानस्पतिक सिद्धांतों एवं समकालीन बायो-एक्टिव न्यूट्रिशन का समन्वित आलोक

१. परिप्रेक्ष्य (Perspective) ​मानव स्वास्थ्य एवं आहार-विज्ञान का इतिहास निरंतर सूक्ष्मता की ओर बढ़ने की यात्रा है। समकालीन पोषण वैज्ञानिक (Nutritional Scientists) आजकल ऐसे खाद्यों के अन्वेषण में जुटे हैं, जो अपनी न्यूनतम शारीरिक संरचना में अधिकतम पोषण घनत्व (Nutrient Density) समाहित किए हों। इस शोध के आधुनिक निष्कर्ष को आज वैश्विक स्तर पर ‘माइक्रोग्रीन्स’

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तकनीकी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: ब्रासिका प्रजातियों के माइक्रोग्रीन्स में पॉलीफिनोल्स प्रोफाइलिंग और आणविक संरचना का मूल्यांकन

1. परिचय एवं अनुसंधान का संदर्भ (Introduction & Context) ​नवंबर 2013 में ‘यूएसडीए’ (USDA – U.S. Department of Agriculture) और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड द्वारा किए गए इस शोध का मुख्य उद्देश्य ब्रासिका (Brassica) कुल की पांच प्रमुख प्रजातियों—रेड कैबेज (लाल पत्तागोभी), रेड मस्टर्ड (लाल सरसों), मिजुना, टर्निप (शलगम) और अमरंथ—के माइक्रोग्रीन्स का गुणात्मक और मात्रात्मक

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प्रकृति का मानसूनी उपहार: क्यों इस मौसम में अमृत समान है नोनी का साग

बदलते मौसम का मिजाज हमारी थाली का रंग भी बदल देता है। तपती गर्मी के बाद जब मानसून की पहली फुहारें पड़ती हैं, तो धरती न केवल तृप्त होती है, बल्कि अपने आंचल से कुछ ऐसे अनमोल उपहार भी निकालती है जो विशेष रूप से इसी मौसम के लिए बने हैं। कल ही हमने बात

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अमृता (Amaranthus): 45°C की जानलेवा गर्मी में हमारी थाली का ‘इमोर्टल सुपरफूड साग’

उत्तर भारत में सूरज इस समय आग की लपटें बरसा रहा है। पारा 45 डिग्री के पार है, गर्म हवाएं शरीर का सारा पानी सोख रही हैं, और हमारा शरीर इस भीषण मौसम से लड़ते-लड़ते बेदम हो चुका है। इस चुभती गर्मी से बचने के लिए हम अक्सर प्रिजर्वेटिव से भरे सिंथेटिक ग्लूकोज, विदेशी सलाद

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आयुर्वेद का काल-चक्र और ‘माइक्रोग्रीन्स’: एंसिएंट विजडम और मॉडर्न सुपरफूड्स का नेचुरल समन्वय

​सृष्टि का एक नियम है—प्रकृति में एक सतत प्रवाह है, जहाँ एक मौसम दूसरे मौसम में धीरे-धीरे विलीन होता है और फसलें दो से तीन महीने तक लगातार खेतों में उपस्थित रहती हैं। आयुर्वेद के महाग्रंथ चरक संहिता और सुश्रुत संहिता भी मौसम के इसी लचीलेपन को स्वीकार करते हैं। वैश्विक स्तर पर आज जिस

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प्रचंड गर्मी का देसी तोड़: बिना टेस्ट से समझौता किए ऐसे बनाएं जौ का सत्तू अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा

​मई-जून की इस झुलसा देने वाली गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जब शरीर का एनर्जी लेवल डाउन होने लगता है, तो हमारा मन अक्सर ठंडी और रिफ्रेशिंग चीजों की तरफ भागता है। बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद कार्बोनेटेड ड्रिंक्स या एडेड शुगर वाले जूस पल भर की तसल्ली तो दे सकते हैं, लेकिन

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​द फोटोनिक रेवोल्यूशन: कैसे LED लाइट स्पेक्ट्रम ने बदला माइक्रोग्रीन्स का न्यूट्रिशनल ब्लूप्रिंट?

​क्या आप जानते हैं कि बंद कमरों (Indoor Chambers) में उगने वाले नन्हे माइक्रोग्रीन्स केवल सही मिट्टी या पानी से ही सुपरफूड नहीं बनते? उनके भीतर छिपे ‘न्यूट्रिशन का खजाना’ खोलने वाली असली चाबी “प्रकाश का रंग” है। ​सन 2013 में प्रकाशित डॉ. के. सामुलिएने (K. Samuolienė) और उनके सहयोगियों के एक क्रांतिकारी शोध पत्र

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ऋग्वेद के ओषधि सूक्त और आधुनिक माइक्रोग्रीन्स का तुलनात्मक विश्लेषण

परिचय (Introduction) ​आधुनिक पोषण विज्ञान (Nutritional Science) में माइक्रोग्रीन्स को ‘फंक्शनल सुपरफूड’ की श्रेणी में रखा गया है। बीज के अंकुरण (Germination) के बाद निकलने वाली पहली दो पत्तियों (Cotyledons) वाली इस अवस्था को इसके असाधारण पोषण प्रोफाइल के लिए जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जिसे आज पश्चिम ‘लाइव फूड’ (Live Food)

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