#AncientGrains

क्लाइमेट चेंज और सूखा: क्यों भविष्य में ‘विरासत उपज’ ही बचाएगी इंसानी सभ्यता?

आज हम सब एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ मौसम का मिजाज हर साल तेजी से बदल रहा है। कहीं असमय भारी बारिश हो जाती है, तो कहीं कड़ाके की गर्मी के बीच महीनों तक सूखे के हालात बने रहते हैं। भूजल (Underground Water) का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है और […]

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​दादी-नानी की रसोई की ओर वापसी: आधुनिक बीमारियों का इकलौता इलाज है ‘सच्चा भोजन’

​हममें से बहुत से लोगों को अपने बचपन का वह दौर बखूबी याद होगा, जब घर में बीमारियों के नाम पर केवल मौसमी सर्दी-खांसी हुआ करती थी। तब अस्पतालों की दौड़ आज जितनी आम नहीं थी और न ही घर की रसोई में दवाइयों के डिब्बे सजे होते थे। हमारी दादी और नानी की रसोई

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​क्या बिना यूरिया-डीएपी के खेती संभव है? विरासत फसलों का आत्मनिर्भर कृषि विज्ञान

​जब भी आज के दौर में पारंपरिक या प्राकृतिक खेती की बात होती है, तो हमारे मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है—”क्या बिना यूरिया और डीएपी (Chemical Fertilizers) के सचमुच अच्छी खेती संभव है? क्या रसायनों के बिना फसलों को कीड़ों और बीमारियों से बचाया जा सकता है?” यह सवाल उठना स्वाभाविक भी

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अस्पताल के महंगे बिल या किसान के पसीने का सम्मान? चुनिए अपनी थाली का सच

आज के इस आधुनिक दौर में हम सभी अपने परिवार को हर सुख-सुविधा देने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं। हमारी कोशिश होती है कि घर का हर सदस्य खुश रहे और सुरक्षित रहे। लेकिन अगर हम पिछले कुछ वर्षों के अपने घरेलू बजट पर गौर करें, तो एक बहुत ही चिंताजनक सच सामने

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कैंसर पैदा करने वाली खेती या धरती को नया जीवन देने वाली ‘विरासत उपज’?

​हम जब भी सुबह उठकर अपने बच्चों के हाथों में भोजन का निवाला देते हैं, तो हमारे मन में एक गहरा संतोष होता है। लेकिन क्या कभी शांत दिमाग से हम इस बात पर विचार करते हैं कि यह अनाज हमारे घर तक पहुँचने से पहले किस प्रक्रिया से गुजरा है? आज की आधुनिक खेती

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​जिम का डिब्बा बंद करिए! इस एक देसी अनाज में है 10 गुना ज्यादा ताकत

आज के दौर में फिट दिखना और सेहतमंद रहना हम सबकी पहली प्राथमिकता बन चुका है। सुबह-सुबह पार्कों में दौड़ते लोग, जिम में पसीना बहाते युवा और डाइट को लेकर सजग होते परिवार इस बात का सबूत हैं कि हम अपनी सेहत को लेकर गंभीर हैं। खुद को फिट रखने के इस सफर में बहुत

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सुपरफूड की रेस में हम अपने दादा-परदादा का ‘अमृत अनाज’ क्यों भूल गए?

आजकल सेहत की दुनिया में एक नया चलन देखने को मिल रहा है। जब भी फिटनेस, अच्छी डाइट या वजन कम करने की बात आती है, तो हमारे सामने कुछ ऐसे नाम उछाले जाते हैं जो सुनने में बहुत आधुनिक और विदेशी लगते हैं—जैसे कीनुआ (Quinoa), ओट्स (Oats) या चिया सीड्स (Chia seeds)। हम में

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बीमारियों से घिरने के बाद याद आएगा या आज ही बदलेंगे थाली?

आज एक बहुत ही शांत और आत्मीय सवाल हम सबको अपने आप से पूछना चाहिए—क्या हमारे घरों में राशन से ज्यादा जगह दवाइयों के पत्तों ने नहीं ले ली है? सुबह की शुरुआत चाय की खुशबू से होने के बजाय, कई बार खाली पेट खाई जाने वाली गैस या बीपी की गोली से होती है।

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​’विरासत उपज’ (Heritage Produce) – विरासत अनाज: क्यों उपयोग करना अब शौक नहीं, मजबूरी है!

आज जब हम सुपरमार्केट की चमचमाती दीर्घाओं में घूमते हैं, तो पैकेटों पर ‘मल्टीग्रेन’, ‘फोर्टिफाइड’ और ‘ग्लूटेन-फ्री’ जैसे बड़े-बड़े दावे लिखे दिखाई देते हैं। हम सेहत की तलाश में हज़ारों रुपये खर्च कर विदेशी ‘किनुआ’ (Quinoa) या ‘ओट्स’ (Oats) को अपनी थाली में सजा रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पोषण

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