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​नवोद्भीद पोषण-दर्शन: षोडश शताब्दी के वानस्पतिक सिद्धांतों एवं समकालीन बायो-एक्टिव न्यूट्रिशन का समन्वित आलोक

१. परिप्रेक्ष्य (Perspective) ​मानव स्वास्थ्य एवं आहार-विज्ञान का इतिहास निरंतर सूक्ष्मता की ओर बढ़ने की यात्रा है। समकालीन पोषण वैज्ञानिक (Nutritional Scientists) आजकल ऐसे खाद्यों के अन्वेषण में जुटे हैं, जो अपनी न्यूनतम शारीरिक संरचना में अधिकतम पोषण घनत्व (Nutrient Density) समाहित किए हों। इस शोध के आधुनिक निष्कर्ष को आज वैश्विक स्तर पर ‘माइक्रोग्रीन्स’ […]

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तकनीकी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: ब्रासिका प्रजातियों के माइक्रोग्रीन्स में पॉलीफिनोल्स प्रोफाइलिंग और आणविक संरचना का मूल्यांकन

1. परिचय एवं अनुसंधान का संदर्भ (Introduction & Context) ​नवंबर 2013 में ‘यूएसडीए’ (USDA – U.S. Department of Agriculture) और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड द्वारा किए गए इस शोध का मुख्य उद्देश्य ब्रासिका (Brassica) कुल की पांच प्रमुख प्रजातियों—रेड कैबेज (लाल पत्तागोभी), रेड मस्टर्ड (लाल सरसों), मिजुना, टर्निप (शलगम) और अमरंथ—के माइक्रोग्रीन्स का गुणात्मक और मात्रात्मक

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आयुर्वेद का काल-चक्र और ‘माइक्रोग्रीन्स’: एंसिएंट विजडम और मॉडर्न सुपरफूड्स का नेचुरल समन्वय

​सृष्टि का एक नियम है—प्रकृति में एक सतत प्रवाह है, जहाँ एक मौसम दूसरे मौसम में धीरे-धीरे विलीन होता है और फसलें दो से तीन महीने तक लगातार खेतों में उपस्थित रहती हैं। आयुर्वेद के महाग्रंथ चरक संहिता और सुश्रुत संहिता भी मौसम के इसी लचीलेपन को स्वीकार करते हैं। वैश्विक स्तर पर आज जिस

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​द फोटोनिक रेवोल्यूशन: कैसे LED लाइट स्पेक्ट्रम ने बदला माइक्रोग्रीन्स का न्यूट्रिशनल ब्लूप्रिंट?

​क्या आप जानते हैं कि बंद कमरों (Indoor Chambers) में उगने वाले नन्हे माइक्रोग्रीन्स केवल सही मिट्टी या पानी से ही सुपरफूड नहीं बनते? उनके भीतर छिपे ‘न्यूट्रिशन का खजाना’ खोलने वाली असली चाबी “प्रकाश का रंग” है। ​सन 2013 में प्रकाशित डॉ. के. सामुलिएने (K. Samuolienė) और उनके सहयोगियों के एक क्रांतिकारी शोध पत्र

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ऋग्वेद के ओषधि सूक्त और आधुनिक माइक्रोग्रीन्स का तुलनात्मक विश्लेषण

परिचय (Introduction) ​आधुनिक पोषण विज्ञान (Nutritional Science) में माइक्रोग्रीन्स को ‘फंक्शनल सुपरफूड’ की श्रेणी में रखा गया है। बीज के अंकुरण (Germination) के बाद निकलने वाली पहली दो पत्तियों (Cotyledons) वाली इस अवस्था को इसके असाधारण पोषण प्रोफाइल के लिए जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जिसे आज पश्चिम ‘लाइव फूड’ (Live Food)

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माइक्रोग्रीन्स अनुसंधान में युगांतरकारी मोड़: २०१३ का ऐतिहासिक पोषण संबंधी विश्लेषण

१. परिचय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Introduction & Historical Context) ​कृषि और पोषण विज्ञान के इतिहास में अगस्त २०१३ का महीना एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है। इस समय तक, ‘माइक्रोग्रीन्स’ (Microgreens) — जिन्हें पौधों के अंकुरण के बाद उनकी शुरुआती हरी पत्तियों (Cotyledons) के चरण में काटा जाता है — मुख्य रूप

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​अंकुरण का वैदिक और आधुनिक विज्ञान: यजुर्वेद के संदर्भ में ‘लिविंग फूड’ की अवस्था

कृषि और वनस्पति विज्ञान के इतिहास में बीजों के अंकुरण (Germination) की अवस्था को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। आज जिसे आधुनिक आहार विज्ञान में ‘माइक्रो ग्रीन्स’ (Microgreens) या ‘लिविंग फूड’ कहा जाता है—यानी बीज के फूटने के ठीक बाद और शुरुआती दो पत्तियों के आने के बीच की अवस्था—उसका एक सटीक और व्यावहारिक अवलोकन

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​नियंत्रित पर्यावरण कृषि में माइक्रोग्रीन्स: खनिज सांद्रता एवं जैव-उपलब्धता (Bio-accessibility) का वैज्ञानिक विश्लेषण

अमूर्त (Abstract) ​मानव पोषण में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Hidden Hunger) को दूर करने के लिए पादप-आधारित जैव-संवर्धन (Bio-fortification) पर निरंतर शोध हुए हैं। इंटरनेट और अकादमिक डेटा माइनिंग के अनुसार, सन् 2012 से 2013 का कालखंड माइक्रोग्रीन्स के न्यूट्रिशनल प्रोफाइल को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने में निर्णायक रहा। अगस्त 2012 में यूनाइटेड

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वैज्ञानिक विश्लेषण रिपोर्ट: विभिन्न पादप विकास माध्यमों और सिंचाई प्रणालियों के तहत खाद्य माइक्रोग्रीन्स की उत्पादकता एवं पैदावार का मात्रात्मक मूल्यांकन (Evaluation of Growth Mediums and Irrigation Systems on the Productivity and Yield of Edible Microgreens)

दस्तावेज़ नियंत्रण एवं मेटाडेटा (Metadata) ​1. अनुसंधान की पृष्ठभूमि और व्यावसायिक उद्देश्य (Research Background & Objective) ​साल 2012 के अंत तक यह पूरी तरह प्रमाणित हो चुका था कि माइक्रोग्रीन्स विटामिन्स और खनिजों के पावरहाउस हैं, जिसके कारण इनकी व्यावसायिक मांग तेजी से बढ़ी। हालांकि, उत्पादकों (Growers) के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि

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वैज्ञानिक विश्लेषण रिपोर्ट: प्रेरणिक रूप से युग्मित प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) का उपयोग करके 25 व्यावसायिक माइक्रोग्रीन्स प्रजातियों के खनिज प्रोफाइल का मात्रात्मक मूल्यांकन (Elemental Profiles in 25 Microgreens Using Inductively Coupled Plasma Mass Spectrometry)

दस्तावेज़ नियंत्रण एवं मेटाडेटा (Metadata) ​1. अनुसंधान की पृष्ठभूमि और वैज्ञानिक उद्देश्य (Research Background & Objective) ​साल 2012 के अंत तक वैज्ञानिक समुदाय यह जान चुका था कि माइक्रोग्रीन्स विटामिन का पावरहाउस हैं। लेकिन मानव शरीर के सुचारू संचालन के लिए केवल विटामिन्स ही नहीं, बल्कि आवश्यक खनिजों (Minerals) जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक

वैज्ञानिक विश्लेषण रिपोर्ट: प्रेरणिक रूप से युग्मित प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) का उपयोग करके 25 व्यावसायिक माइक्रोग्रीन्स प्रजातियों के खनिज प्रोफाइल का मात्रात्मक मूल्यांकन (Elemental Profiles in 25 Microgreens Using Inductively Coupled Plasma Mass Spectrometry) Read More »