अथर्ववेद (८/७/४) का नव-प्राण सिद्धांत: नवांकुरों में निहित कोशिकीय पुनर्जीवन (Cellular Regeneration) का आदि-विज्ञान
आधुनिक जैव-चिकित्सीय विज्ञान (Biomedical Science) आज जिस ‘सेलुलर रीजनरेशन’ (कोशिकीय पुनर्जीवन) और ‘एंटी-एजिंग’ (जरा-निवारण) तकनीकों पर शोध कर रहा है, उसका एक अत्यंत गहरा और सूक्ष्म सिद्धांतात्मक ढांचा भारत के प्राचीनतम ज्ञान-स्रोत अथर्ववेद में हजारों वर्ष पूर्व ही स्थापित किया जा चुका था। वैदिक ऋषियों ने प्रकृति की प्रत्येक अवस्था का गहन अनुभूत विश्लेषण किया […]


