#RootedInScience

अथर्ववेद (८/७/४) का नव-प्राण सिद्धांत: नवांकुरों में निहित कोशिकीय पुनर्जीवन (Cellular Regeneration) का आदि-विज्ञान

आधुनिक जैव-चिकित्सीय विज्ञान (Biomedical Science) आज जिस ‘सेलुलर रीजनरेशन’ (कोशिकीय पुनर्जीवन) और ‘एंटी-एजिंग’ (जरा-निवारण) तकनीकों पर शोध कर रहा है, उसका एक अत्यंत गहरा और सूक्ष्म सिद्धांतात्मक ढांचा भारत के प्राचीनतम ज्ञान-स्रोत अथर्ववेद में हजारों वर्ष पूर्व ही स्थापित किया जा चुका था। वैदिक ऋषियों ने प्रकृति की प्रत्येक अवस्था का गहन अनुभूत विश्लेषण किया […]

अथर्ववेद (८/७/४) का नव-प्राण सिद्धांत: नवांकुरों में निहित कोशिकीय पुनर्जीवन (Cellular Regeneration) का आदि-विज्ञान Read More »

सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान १५/१९-२१) का ओजस सिद्धांत: नवांकुरों में निहित ‘व्याधिक्षमत्व’ का आदि-विज्ञान

चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज पूरी दुनिया ‘इम्यूनोमॉड्यूलेशन’ (Immunomodulation) और ‘सेलुलर वाइटैलिटी’ (Cellular Vitality) जैसे आधुनिक शब्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है। जब आधुनिक बायो-मेडिकल विज्ञान यह सिद्ध करता है कि वनस्पति की शुरुआती अवस्था में ऐसे सक्रिय जैव-तत्व (Bio-active compounds) होते हैं जो मानव शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा

सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान १५/१९-२१) का ओजस सिद्धांत: नवांकुरों में निहित ‘व्याधिक्षमत्व’ का आदि-विज्ञान Read More »