#HeritageProduce

क्लाइमेट चेंज और सूखा: क्यों भविष्य में ‘विरासत उपज’ ही बचाएगी इंसानी सभ्यता?

आज हम सब एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ मौसम का मिजाज हर साल तेजी से बदल रहा है। कहीं असमय भारी बारिश हो जाती है, तो कहीं कड़ाके की गर्मी के बीच महीनों तक सूखे के हालात बने रहते हैं। भूजल (Underground Water) का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है और […]

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​दादी-नानी की रसोई की ओर वापसी: आधुनिक बीमारियों का इकलौता इलाज है ‘सच्चा भोजन’

​हममें से बहुत से लोगों को अपने बचपन का वह दौर बखूबी याद होगा, जब घर में बीमारियों के नाम पर केवल मौसमी सर्दी-खांसी हुआ करती थी। तब अस्पतालों की दौड़ आज जितनी आम नहीं थी और न ही घर की रसोई में दवाइयों के डिब्बे सजे होते थे। हमारी दादी और नानी की रसोई

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अस्पताल के महंगे बिल या किसान के पसीने का सम्मान? चुनिए अपनी थाली का सच

आज के इस आधुनिक दौर में हम सभी अपने परिवार को हर सुख-सुविधा देने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं। हमारी कोशिश होती है कि घर का हर सदस्य खुश रहे और सुरक्षित रहे। लेकिन अगर हम पिछले कुछ वर्षों के अपने घरेलू बजट पर गौर करें, तो एक बहुत ही चिंताजनक सच सामने

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​मिट्टी की पुकार: क्या हम अपनी जीवनदायिनी धरती का स्वास्थ्य भूल रहे हैं?

हमारे भारतीय संस्कारों और संस्कृति में ‘धरती’ को केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि ‘मां’ का आदरणीय दर्जा दिया गया है। एक ऐसी जीवनदायिनी शक्ति, जिसने सदियों से बिना किसी भेदभाव के हर पीढ़ी का भरण-पोषण किया है। सुबह की पहली किरण से लेकर ढलती साँझ तक, इस मिट्टी ने हर मौसम को हंसकर

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​क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को वसीयत में सिर्फ बीमारियाँ देकर जाएंगे?

हम अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उनके लिए अच्छा बैंक बैलेंस, सुरक्षित जमीन-जायदाद और बेहतरीन शिक्षा की व्यवस्था करना हर माता-पिता का सबसे बड़ा सपना होता है। इन सब तैयारियों के पीछे हमारा एक ही उद्देश्य होता है—हमारे जाने के बाद भी हमारे बच्चे एक सुरक्षित और खुशहाल जीवन

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सुपरफूड की रेस में हम अपने दादा-परदादा का ‘अमृत अनाज’ क्यों भूल गए?

आजकल सेहत की दुनिया में एक नया चलन देखने को मिल रहा है। जब भी फिटनेस, अच्छी डाइट या वजन कम करने की बात आती है, तो हमारे सामने कुछ ऐसे नाम उछाले जाते हैं जो सुनने में बहुत आधुनिक और विदेशी लगते हैं—जैसे कीनुआ (Quinoa), ओट्स (Oats) या चिया सीड्स (Chia seeds)। हम में

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बीमारियों से घिरने के बाद याद आएगा या आज ही बदलेंगे थाली?

आज एक बहुत ही शांत और आत्मीय सवाल हम सबको अपने आप से पूछना चाहिए—क्या हमारे घरों में राशन से ज्यादा जगह दवाइयों के पत्तों ने नहीं ले ली है? सुबह की शुरुआत चाय की खुशबू से होने के बजाय, कई बार खाली पेट खाई जाने वाली गैस या बीपी की गोली से होती है।

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‘विरासत उपज’ (Heritage Produce)-तीसी(Flaxseeds) -(1)

विरासत उपज श्रृंखला: अलसी (तीसी) – हमारी परंपरा, आधुनिक सुपरफूड और समापन कड़ी ​नमस्कार दोस्तों! हमारी विशेष श्रृंखला ‘विरासत उपज’ (Heritage Produce) की पिछली कड़ी में हमने अलसी, जिसे हमारे स्थानीय क्षेत्रों में ‘तीसी’ भी कहा जाता है, के ऐतिहासिक महत्व और इसके पोषण से जुड़े कुछ शुरुआती पहलुओं पर चर्चा की थी। आज इस

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​’विरासत उपज’ (Heritage Produce) – विरासत अनाज: क्यों उपयोग करना अब शौक नहीं, मजबूरी है!

आज जब हम सुपरमार्केट की चमचमाती दीर्घाओं में घूमते हैं, तो पैकेटों पर ‘मल्टीग्रेन’, ‘फोर्टिफाइड’ और ‘ग्लूटेन-फ्री’ जैसे बड़े-बड़े दावे लिखे दिखाई देते हैं। हम सेहत की तलाश में हज़ारों रुपये खर्च कर विदेशी ‘किनुआ’ (Quinoa) या ‘ओट्स’ (Oats) को अपनी थाली में सजा रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पोषण

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